सफलता किनके कदम चूमती है ?

कोई भी इंसान बुधिमान इस संसार में आकर, रोज़ नयी नयी परेशानियों का सामना करके बनता है | जितने भी बड़े विद्वान है, वज्ञानिक है वो सब जन्म से वेसे नहीं थे वो भी इसी संसार के है और मेहनत करके बने है | अगर कोई जन्म से ही बुधिमान है तो शायद हो सकत है गर्भकाल के दौरान ही उसको ये गुण अपने माता से मिलें हो | या फिर पीडी डर पीड जो अच्छी चीज़े उनके परिवार में चली आ रही होंगी उनसे उसको बुद्धिमता मिले | जब तक भारत व लव-कुश के साथ शकुंतला व जानकी का नाम लिया जाता रहेगा, यह तथ्य अपनी जगह अटल रहेगा | पर यह भी नहीं भूलना चाहिए की वरदराज, गोपमाल, कालिदास जैसे विद्वान भी इस देश में हुए है, जिन्हें शुरू में मुर्ख, बेवकूफ और भी पता नहीं क्या क्या कहा गया था | लेकिन अपनी मेहनत और बुद्धिमता से उन्होंने "इडियट" से अपने आप को "जीनियस" बनाकर दिखा दिया | ये विशेषता इंसान के साथ ही है कि वह जो चाहे वह बन सकता है | और ये सब इंसान को उस भगवान् ने दी है और उसके साथ साथ ऐसी परिस्थितियाँ भी बना दी |

कोई जरुरी नहीं कि हर प्रतिभावान का मूल्याकन अपने आप ही हो जाये और जनता उसकी जय जयकार करने लगे | यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमे बहुत लम्बा समय लगता है | अगर व्यक्ति लोगो के उपहास से परेशान होकर, निराश होकर अपने चलते मार्ग को छोड़कर चला जाये तो वह उस सोभाग्य से वंचित हो जाता है जो उसको भविष्य में उसके प्रयासों से मिलने वाला होता है | धीरज और हमेशा प्रयास करते रहना ये ऐसे गुण है जिनसे आप अपनी परिस्थितियों को अनुकूल बना पाते है और वांछित सफलताये प्राप्त करने में सफल हो जाते है | सफलता का लफ़ मूलमंत्र है और इसका साक्षी उन व्यक्रियों के जीवन क्रय से मिली है, जो शुरू में तो साधारण व्यक्ति थे, पर बाद में इतिहास में अपना स्थान बना गए |
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